Wednesday, September 23, 2015

मैं वो परिंदा जो अब उड़ना चाहता हूँ...


मैं वो परिंदा जो अब उड़ना चाहता हूँ,
वापिस ना अपने घर कभी मुड़ना चाहता हूँ।
हार चूका, थक चूका अब टूट गया हूँ,
है नहीं अब कोई अपना, सबसे छूट गया हूँ।
किया जिनके लिए उन्होंने मुझे नाकारा समझा,
जीने चला जिसके संग, उसने ही आवारा समझा।
नहीं है चाह अब जिंदगी में कुछ करने की,
किसे है परवाह इस दुनिया अब जीने मरने की।

मैं वो परिंदा जो अब उड़ना चाहता हूँ,
वापिस ना अपने घर मुड़ना चाहता हूँ।।

पल पल हर पल अब कटने लगा हूँ,
जिंदगी की सच्चाई से भटकने लगा हूँ। 
उम्मीद की जिस जिस से सिर्फ प्यार की,
उन सब को हर वक़्त अब मैं खटकने लगा हूँ।
पहले दोस्तों की फिर अपनों की फिर उनकी नज़रों से गिरा,
आज मुकाम वो आया की खुद की नज़रों से गिरने लगा हूँ। 
मैं वो परिंदा जो अब उड़ना चाहता हूँ,
वापिस ना अपने घर मुड़ना चाहता हूँ।।

{अमरदीप सिंह }

Sunday, November 2, 2014

हम ही रिश्ते का लिहाज़ कर बैठे....


क्या मजाल थी उनकी कि, 
वो इतना कुछ कह जाते।  
ये तो हम ही रिश्ते का लिहाज़ कर बैठे,
फिर नफरत सहना तो अपना मुकद्दर है।।  

<<< अमरदीप सिंह <<< 

Wednesday, September 18, 2013

अपनी ये हकीकत किसको दूँ।।


दर्द-ए-दिल की अपनी ये विरासत किसको दूँ,
तन्हाईयों से लिपटी अपनी ये चाहत किसको दूँ,
हमने तो हर रिश्तों से ठोकरे ही खायी है अब तलक, 
ठोकरों से भरी अपनी ये हकीकत किसको दूँ।।


>>>>अमरदीप<<<<

Friday, November 2, 2012

खुदा ही गवाह था मेरे ज़ख़्मी दिल का.....


ना अब तक पता था उन्हें मेरे हाल-ए-दिल का ,
खुदा ही गवाह था मेरे ज़ख़्मी दिल का.....
ना गौर से देखा कभी उन्होंने मेरी तनहाई को,
मै ही चल पड़ा था थाम के उनकी परछाई को....
इक जोत जगाई थी फिर से मैंने अपने दिल में,
पता ना था, हम भी शामिल थे उनके कातिल में....





                                                     >>>>अमरदीप<<<< 

बड़ी शिद्दत से उसे मै याद आता होगा...


इश्क में हर बार लुटना मेरा मुक़द्दर था,
मेरा गम ही मेरी जिन्दगी का सिकंदर था.. 
मेरा मुरशद भी मुझसे यही चाहता होगा,
बड़ी शिद्दत से उसे मै याद आता होगा..
ना जिक्र आता होगा उनकी बातो में अब मेरा,
अब तो उनका दिल भी ना रहा मेरा बसेरा..


>>>>अमरदीप<<<<

Wednesday, October 31, 2012

अक्सर उनका फांसला बढ़ता ही गया...



उनके ज़ख़्म इतने गहरे थे की, 
जब भी मैंने उनकी खातिर मरहम बनना चाहा,
तो अक्सर उनका दर्द बढ़ता ही गया...
उनके राह में इतने पहरे थे की,
जब भी मैंने उन तक बढ़ना चाहा,
तो अक्सर उनका फांसला बढ़ता ही गया...



>>>>अमरदीप<<<<

Monday, October 15, 2012

पहले आते है लोग जिन्दगी में हसीन वादों के साथ...


पहले आते है लोग जिन्दगी में हसीन वादों के साथ, 
फिर छोड़ जाते है हमें तनहा यादों के साथ, 
हम खुद को कोसतें है फिर तमाम उम्र,
आखिर समझौता करना ही पड़ता है उन इरादों के साथ.....

>>>>अमरदीप<<<<